पुरुषों के लिए तैयार की गई गर्भनिरोधक गोलियां जल्द ही बाजार में आने वाली हैं. एक नए अध्ययन से पता चलता है कि पुरुष उन्हें जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने के लिए उत्सुक हैं.

फिलहाल ऐसी गर्भनिरोधक गोलियां उपलब्ध नहीं हैं जिनका इस्तेमाल पुरुष कर सकें. साथ ही, पहले से ही यह आरोप है कि अगर ऐसी गोली आ भी जाती है, तो पुरुष उन्हें लेना नहीं चाहेंगे या उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि वे जिम्मेदारी के साथ इन गोलियों का इस्तेमाल करेंगे.

लेखिका सुजाना श्रोब्सडॉर्फ ने अप्रैल 2022 में द वॉशिंगटन पोस्ट में लिखा था, “मान लीजिए कि अगर यह नई नॉन-हार्मोनल गोली बाजार में आ जाती है, तो क्या वाकई में पुरुष इसे लेने को तैयार होंगे? क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि वे हर दिन एक गोली लेंगे?”

दरअसल, दुनिया भर में 50 फीसदी गर्भधारण अनचाहे होते हैं और आखिरकार महिलाओं को इनका बोझ उठाना पड़ता है. साथ ही, यह तर्क दिया जाता है कि पुरुष तब तक गर्भनिरोधक को गंभीरता से नहीं लेंगे, जब तक वे स्वयं गर्भवती नहीं होंगे.

इस पूर्वाग्रह के पीछे की वजह यह हो सकती है कि कंडोम के इस्तेमाल को लेकर पुरुषों का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं है. अपने साथी की सहमति के बिना सेक्स के दौरान चुपके से कंडोम उतारना (स्टेल्थिंग) पुरुषों के बीच आम बात है. उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया में 32 फीसदी महिलाओं और 19 फीसदी पुरुषों ने स्टेल्थिंग का अनुभव किया है.

हालांकि, पुरुषों के बीच गर्भनिरोधक के इस्तेमाल की वकालत करने वाले लोग इस आलोचना को खारिज करते हैं. उनका तर्क है कि पुरुषों के इस्तेमाल वाले गर्भनिरोधकों की मांग कभी ज्यादा नहीं रही है. उनका कहना है कि जन्म नियंत्रण की जिम्मेदारी साझा करने के लिए पुरुष तैयार हैं.

गर्भनिरोधक गोली चाहते हैं पुरुष
फरवरी 2023 में बोस्टन में रिप्रोडक्टिव हेल्थ इनोवेशन सम्मेलन में पेश किया गया एक नया अध्ययन इन दावों का समर्थन करता है. इस अध्ययन में दिखाया गया है कि पुरुष और उनके साथी, पुरुष गर्भनिरोधक के नए तरीके के पक्ष में हैं. महिलाओं को भी यह भरोसा है कि उनके साथी जिम्मेदारी के साथ गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करेंगे.

द बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने एक सर्वे कराया है, जिसमें आठ अलग-अलग देशों के 19,000 वयस्क पुरुषों को शामिल किया गया है. ये देश हैं नाइजीरिया, केन्या, आइवरी कोस्ट, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, वियतनाम, बांग्लादेश, भारत और अमेरिका.

अध्ययन में शामिल कंसल्टेंसी फर्म डिजायरलाइन के कार्यकारी निदेशक स्टीव क्रेच्समर ने कहा, “हमने पुरुषों से पूछा कि क्या वे गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना चाहते हैं? अगर हां, तो किस रूप में चाहते हैं. हमने सोचा कि स्थिति का निष्पक्ष रूप से आकलन करके हम कुछ समस्याओं को हल कर सकें.”

अध्ययन में पाया गया कि अलग-अलग देशों में 78 से 98 फीसदी पुरुष गर्भनिरोधक गोलियां लेना चाहते हैं. इन गोलियों की मांग काफी अधिक थी. इससे कोई फर्क नहीं पड़ा कि उन पुरुषों का अपने पार्टनर के साथ किस तरह का संबंध था.

महिलाओं को अपने पार्टनर पर भरोसा है
अध्ययन का उद्देश्य यह भी पता लगाना था कि महिलाएं इस मुद्दे पर क्या सोचती हैं. क्रेच्समर ने डीडब्ल्यू को बताया, “हम महिलाओं से यह भी पूछना चाहते थे कि क्या वे गर्भनिरोधक के इस्तेमाल को लेकर पुरुषों पर भरोसा करती हैं. अगर पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक उपलब्ध हो जाएं, तो फिर उनके लिए गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल किस तरह बदल जाएगा.”

सर्वे से पता चला कि पुरुष गर्भनिरोधक की मांग महिलाओं के बीच उतनी ही अधिक थी जितनी पुरुषों के बीच थी. इसके अलावा, महिलाओं को इस बात पर काफी भरोसा है कि उनके पुरुष साथी काफी जिम्मेदारी के साथ गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करेंगे. वियतनाम, नाइजीरिया और बांग्लादेश में 82 से 88 फीसदी महिलाओं ने बताया कि अगर उनके साथी यह बताते हैं कि वे गर्भनिरोधक गोली ले रहे हैं, तो वे उनकी बात पर पूरी तरह भरोसा करेंगी.

अमेरिका स्थित ‘मेल कॉन्ट्रासेप्टिव इनिशिएटिव’ की कार्यकारी निदेशक हैदर वाहदत ने डीडब्ल्यू को बताया, “डेटा से पता चलता है कि पुरुष गर्भनिरोधक के नए तरीके को अपनाना चाहते हैं और महिलाओं को भी इस बात पर भरोसा है. हालांकि, अगर किसी महिला को अपने पुरुष साथी पर भरोसा नहीं है, तो दोनों गर्भनिरोधक का इस्तेमाल कर सकते हैं.”

बदल रही लैंगिक भूमिका
वाहदत के मुताबिक, 1960 के दशक में महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोली आई थी. इसके बाद से समाज में गर्भनिरोधक के इस्तेमाल को लेकर पुरुषों की भूमिका लगभग खत्म हो गई थी.

उन्होंने कहा, “गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना या न करना, महिलाओं के अधिकारों से जुड़ गया है, लेकिन अब हम पुरुष गर्भनिरोधकों के साथ एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच रहे हैं और लोग उन पर ध्यान दे रहे हैं.”

सर्वे के डेटा से पता चलता है कि अगर कोई पुरुष किसी महिला के साथ रिश्ते को लेकर काफी ज्यादा प्रतिबद्ध है, तो वह बच्चे पैदा न करने के फैसले में भी उतनी ही जिम्मेवारी से शामिल होना चाहता है, जितना बच्चे पैदा करने को लेकर होना चाहता है.

वाहदत ने कहा, “यह डेटा ऐसे समय में आया है जब पुरुष मर्दानगी को लेकर ज्यादा चर्चा कर रहे हैं और अब वे हर फैसले में पूरी तरह भागीदार बनना चाहते हैं.”

पुरुष गर्भनिरोधक को लेकर बाधाएं
पुरुष सैद्धांतिक तौर पर बच्चे न पैदा करने के फैसले में भागीदार बनना चाहते हैं, लेकिन सिर्फ गर्भनिरोधक गोली लेने के अलावा भी कई ऐसी बाधाएं हैं जिनसे उन्हें निजात पाना होगा.

दरअसल, गर्भनिरोधक गोलियां लेने से कुछ समय के लिए पुरुषों में बच्चे पैदा करने की क्षमता खत्म हो जाती है. ऐसे में कितने पुरुष इस बात से खुश होंगे कि वे कुछ समय के लिए बच्चे पैदा नहीं कर सकते. क्या वे ऐसा करने के लिए राजी होंगे.

पुरुष गर्भनिरोधक गोलियों को लेकर बड़े पैमाने पर चल रहे परीक्षणों के नतीजे सकारात्मक दिख रहे हैं. हालांकि, कुछ परीक्षणों को इस वजह से रद्द कर दिया गया क्योंकि यह चिंता जताई गई कि इससे कई साइड इफेक्ट हो सकते हैं. हो सकता है कि पुरुषों की बच्चे पैदा करने की क्षमता खत्म हो जाए.

सुरक्षित और असरदार गोली बनाने की जरूरत
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने टिप्पणी की है कि यह गोली पुरुषों को उसी तरह कमजोर बना देगी जैसे महिलाएं दशकों से इस गोली के दुष्प्रभावों का सामना कर रही हैं. हालांकि, एफडीए जैसे दवा नियामक पुरुष गर्भनिरोधक गोली के परीक्षणों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं.

बच्चे पैदा करने की क्षमता खत्म होने की चिंता मजाक का विषय नहीं है. अहम बात यह है कि बाजार में भेजे जाने से पहले गर्भनिरोधक गोली को लेकर जो चिंताएं हैं उन्हें दूर करने की जरूरत है.

आखिरकार, महिलाएं भरोसा कर सकें कि उनके साथी यह गोली लेंगे उससे पहले पुरुषों को भरोसा करना होगा कि ये गोलियां सुरक्षित और असरदार हैं.